रामू जी उन सब जर्नलिस्ट्स का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्होंने ऐसे समय में पत्रकारिता शुरू की जब देश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव शुरू हुए थे। रामू जी ने ट्रेनी के तौर पर पत्रकारिता शुरू की और अखबार के हर पन्ने के लिए और हर पन्ने पर काम किया। उनका मानना है कि भारतीय समाज में आ रहे तेज बदलाव के दौर में पत्रकारिता अपनी भूमिका सही से नहीं निभा पा रही है। मीडिया हाउस गलत तरह से व्याख्याएं प्रस्तुत कर रहे हैं और बेचारा पत्रकार उनमें फंसा हुआ है। इन व्याख्याओं से भले ही अभी इन मीडिया हाउस को फायदा दिखाई दे रहा हो लेकिन दीर्घावधि में उनपर संकट आना तय है। पत्रकारिता को पत्रकारिता के तौर पर ही लेना होगा, प्रोडक्ट के तौर पर नहीं। रामू जी इस ब्लाग अपने पत्रकार साथियों को सार्थक संवाद का प्लेटफार्म देना चाहते हैं। यह तभी संभव हो पाएगा जब पत्रकार साथी गंभीरता से खुद इस ब्लाग को संवाद का माध्यम बनाने में रुचि लेंगे, अन्यथा यह एकालाप-प्रलाप से ज्यादा कुछ नहीं माना जाएगा।